उत्सव · अगस्त्यCelebration · Agastya

मेरी सहेली शशी का दो वर्षीय पोता

अगस्त्य हो तुम कितने प्यारे बच्चे,हो तुम कितने मन के सच्चे,हो तुम नन्हें फूल चमन के जो सबको लगते प्यारे,तुम्हारी खुशबू से महक रहा है घर संसार हमारा।तन कोमल मन सुन्दर है तुम्हारा,तुम्हारी मनमोहिनी छवि सबके मन को है भाती,मधुर मधुर शब्द तुम्हारे सबके मन को हैं लुभाते,तुम्हारा भोलापन सबको करता है आकर्षित,ईश्वर की अनमोल कृति हो तुम,आंगन में फैला उजाला हो तुम,परम आनन्द और प्रेम के सुख से पूर्ण माता-पिता कभी गोद में, कभी पालने में लिटाकर दुलार करते हैं तुम्हारा,देखकर मन नहीं भरता उनका चाहे देखें हज़ार बार तुम्हें,ठुमक ठुमक कर चलते हो तुम,सर्वस्व न्योछावर हुआ दादी का मन निहार तुम्हें,जी करता है उनका हर पल पलकों पर रखूं तुम्हें।हर्षित और आनन्दित होते हैं सभी बाल लीलाएं देख तुम्हारी,दादी की आंखों का तारा हो तुम,मम्मी-पापा के भविष्य का सपना सुहाना हो तुम,रौनक है पूरे घर में चंचलता और शरारतों से तुम्हारी,शुभ मंगलमय जीवन हो तुम्हारा,यही कामना और आशीर्वाद है हमारा।

सूक्ष्म दादी