विदाई · यजत
यजत के सिंगापुर में कॉलेज जाने पर विदाई कविता
यजत, आई है वह शुभ घड़ी नाच उठा मन मोर,तुम्हारी मेहनत रंग लायी, आयी जीवन में नव भोर।मिली है तुम्हें सुदृढ़ नींव, इमारत तुम्हें बनानी है,उत्कृष्टता, सफलता, सृजनता के लिए नए द्वार अपनाने है।नया जीवन, नई चुनौतियों का सामना करना है तुमने,सतत साधना से लक्ष्य को पाना है तुमने।मनोयोग, आत्मविश्वास, निष्ठा भाव से कार्य करना है तुमने।हँसता गाता नित्य निरन्तर सबका मन हर्षाता चल,पथ पर आने वाली बाधा को दलते चल।कदम- कदम पर फूल खिलाकर, धरती को महकाता चल।तुम शिल्पकार हो, कर्णधार हो, जीवन नैय्या है पार लगानी।यही आशीर्वाद और कामना हमारी